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60 हजार टन का टारगेट, अब तक 13 हजार ही खरीदे राेज औसतन दाे हजार टन धान खरीदना बड़ी चुनाैती

जिले में जिस गति से धान की खरीद हाे रही है, ऐसे में टारगेट का 50 फीसदी भी पूरा करना विभाग के लिए चुनाैती बन गई है। जबकि डीएम ने इसे प्राथमिकता बताया है। धान खरीद की समय सीमा 31 मार्च से घटाकर 31 जनवरी कर दी गई है। ऐसे में अब महज 24 दिन शेष बचे हैं। 60 हजार टन धान खरीद के टारगेट में से केवल 13 हजार टन की ही खरीद हाे सकी है।

शेष दिनाें में राेज औसतन दाे हजार टन खरीद करने के बाद ही टारगेट पूरा हाे पाएगा। लेकिन अभी राेज 500 टन भी खरीद नहीं हाे पा रही है। ऐसे में अफसराें की परेशानी और बढ़ गई है। इसकाे लेकर सहकारिता विभाग की ओर से लगातार प्रखंड स्तर के पदाधिकारियाें काे आदेश-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। साथ ही धान खरीद के लक्ष्य काे कम करने के लिए विभाग काे पत्र भेजा गया है।

40 हजार टन लक्ष्य तय करने के लिए विभाग काे पत्र
डीएम के स्तर पर सप्ताहभर पहले खाद्य व उपभाेक्ता संरक्षण विभाग के संयुक्त सचिव काे पत्र भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि हर बार 40 हजार टन ही लक्ष्य हाेता था। नवगछिया अनुमंडल के गंगा व काेसी के कारण धान उत्पादक प्रभावित हैं। साथ ही कहलगांव की कई पंचायत गंगा नदी की बाढ़ से प्रभावित है।

जगदीशपुर के कतरनी धान की बिक्री पैक्साें के माध्यम से नहीं होती है। पीरपैंती की 12 पंचायताें में धान का उत्पादन नहीं के बराबर हाेता है। वहां मक्का व गन्ने की खेती की जाती है। इसलिए 60 हजार टन से लक्ष्य कम करके 40 हजार टन किया जाए।



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