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‘लीची उन्नति’ के प्रशिक्षण से बगीचा बनेगा मॉडल, फल भी लगेंगे ज्यादा

राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुशहरी द्वारा कोका कोला इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुरूग्राम, व देहात स्टार्ट अप के साैजन्य से कांटी के लशकरीपुर में ‘लीची उन्नति’ का प्रशिक्षण दिया गया। 30 किसानों ने लीची के बाग में छत्रक प्रबंधन, पुराने बागों का जीर्णोद्धार, बगीचों की देखभाल का प्रशिक्षण लिया।

4 साल पहले के जीर्णोद्धार किए गए लीची बागों का निरीक्षण करते हुए केंद्र के निदेशक डॉ. विशाल नाथ ने कहा कि लीची पेड़ के मुख्य शीर्ष को छंटनी कर छत्रक के केंद्र को खोलें, जिससे सूरज का प्रकाश सभी शाखाओं पर पड़े व पेड़ की सभी शाखाओं पर फल लगे।

लशकरीपुर का लीची बाग मॉडल बगीचा बन सकता है। लशकरीपुर के लीची के बाग में ही किसानों को दो पौधों में शाखाओं का विरलीकरण, गर्डलिंग से हर वर्ष फल लाना, जीर्णोद्धार के लिए शाखाओं को काटने योग्य को चिन्हित कर दिखाया गया।

प्रशिक्षण में शामिल होने वाले किसानों में लशकरीपुर, सदातपुर, कलवारी, छपरा के शामिल थे। किसानों को बोर्डो पेस्ट बनाने के तरीके के अलावा, लीची के साथ मुर्गीपालन की भी सलाह दी गई। देहात स्टार्ट अप के स्थानीय संयोजक अभिनव विवेक के कहा कि देहात एवं कोका कोला इंडिया प्राइवेट लिमिटेड मिलकर फल को खरीदने का भी काम करेंगे।



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प्रशिक्षण देते लीची अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. विशाल नाथ।


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