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जालसाजी कर नियुक्त हुए शिक्षकों पर चार साल बाद फाइल होगी चार्जशीट

जालसाजी कर नियुक्त हुए दो शिक्षकों पर जल्द ही जोगसर पुलिस कोर्ट में चार्जशीट फाइल करेगी। केस की जांच पूरी हो गई और सिटी एसपी ने आईओ को चार्जशीट फाइल करने का निर्देश दिया है। मामला जोगसर थाना केस नंबर-16/16 से संबंधित है। निगरानी जांच के बाद 13 जनवरी 2016 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार सरोज ने आदमपुर (अब जोगसर) थाने में उक्त केस दर्ज कराया था।

जिसमें पीरपैंती के टोपरा टोला निवासी शिक्षक वीरेंद्र कुमार तिवारी और अंतीचक के औरिया गांव की शिक्षिका नीतू कुमारी को आरोपी बनाया गया था। पुलिस की जांच में दोनों पर केस सत्य पाया गया है। यानी प्राथमिकी में जो आरोप दोनों पर लगाए गए थे, वह सही पाए गए। दोनों आरोपी शिक्षक कोर्ट में सरेंडर कर जमानत पर हैं। उन पर अभियोजन स्वीकृति भी विभाग से मिल चुकी है और केस की जांच भी पूरी हो चुकी है। इसलिए अंतिम कार्रवाई चार्जशीट फाइल करने की तैयारी की जा रही है।

जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया था जांच का आदेश

पटना हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर आदेश दिया था कि राज्य भर में उच्चतर माध्यमिक, माध्यमिक, पुस्तकालय अध्यक्ष व प्राथमिक विद्यालय में वर्ष 2006 से 2014 तक नियोजित शिक्षकों के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से कराई जाए। पुराने भागलपुर प्रक्षेत्र के जिलों में हुई गड़बड़ी की जांच निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के तत्कालीन इंस्पेक्टर सुरेंद्र कुमार सरोज को सौंपी गई थी।

क्या था मामला

हाईकोर्ट के आदेश पर भागलपुर में शिक्षक नियोजन की जांच निगरानी अन्वेषण कर रही थी। जांच में 50 से अधिक शिक्षकों के अंकपत्र में फर्जीवाड़ा करने का खुलासा हुआ था। मामला वर्ष 2011 में हुए बिहार एलिमेंट्री टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (बीईटीइटी) से जुड़ा है। इस परीक्षा में अभ्यर्थियों के अंक पत्र को निगरानी ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति को सत्यापन के लिए भेजा था। जांच में जिन शिक्षकों का प्रमाण-पत्र फर्जी पाया गया था, उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।

ऐसे हुआ था फर्जीवाड़ा

निगरानी जांच में शिक्षकों के अंकपत्रों में कई गड़बड़ियां मिली थी। विषयों के अंक में अंतर, पिता के नाम, जाति में बड़े पैमाने पर त्रुटियां पाई गई थी। अधिकतर अंक पत्र में बीएसईबी ने अंकों के फेरबदल करने के कारण अंक पत्र को फर्जी करार दिया था। जिसका अंक पत्र जारी ही नहीं हुआ था और उसने नौकरी के लिए फर्जी अंक पत्र जमा कर दिए थे। रॉल नंबर और सीरियल नंबर नॉट इश्यूड अंकित होने के बाद भी अंक पत्र जारी हो गया था। कई अभ्यर्थी तो नॉट क्वालिफाइड थे, लेकिन उनके अंक पत्र में क्वालिफाइड अंकित था।



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फाइल फोटो।


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