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10 साल तक के बच्चों को छठ घाट लेकर आये, मन्नत ही ऐसी थी कि तोड़ नहीं पाए

छठ मनौती का पर्व है। मान्यता है कि छठ मैया से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। कोई बेटा मांगता है तो कोई सुहाग की लंबी उम्र की कामना करता है। मुराद पूरी होती है तो मन्नत के हिसाब से घाट पर पूजा करनी होती है। इस बार प्रशासन ने कोरोना के संक्रमण को लेकर 10 साल से कम उम्र के बच्चों और बीमार वृद्ध के लिए घाट पर जाने की मनाही की थी। इसके बाद भी घाट पर अधिक संख्या में बच्चे दिखे, परिवार वालों ने बताया कि मान्यता पूरी करने लिए प्रशासन का नियम तोड़ना पड़ा।

मन्नत पूरी हुई तो कराया बेटे का मुंडन

दीघा के राजेश और उनकी पत्नी ने छठ मैया से बेटे के लिए मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी हुई तो संकल्प लिया कि बेटे का मुंडन छठ मैया के घाट पर कराएंगे। कोरोना काल था, प्रशासन की मनाही भी थी लेकिन परिवार बेटे को पाटीपुल घाट लेकर आया और मुंडन कराया।

बेटे की मुराद हुई पूरी, गोद में लेकर आए बच्चे

छठ में आए श्रद्धालुओं में अधिक संख्या में ऐसे लोग भी मिले जो बेटे की मुराद पूरी होने पर बच्चों को गोद में लेकर घाट तक आए थे। राजीवनगर के महेश भी बेटे को लेकर घाट तक आए थे। उन्हें पता था कि प्रशासन ने बच्चों को घाट तक ले जाने के लिए मना किया है, लेकिन मन्नत ही ऐसी थी कि वह तोड़ नहीं पाए। दीघा की कविता कुमारी का कहना है कि मन्नत थी बच्चे को घर से पैदल घाट तक लेकर जाएंगी और वहां उसके हाथ से प्रसाद चढ़वाएंगी। इस कारण से उन्हें प्रशासन की मनाही के बाद भी बच्चे को घाट तक लाना पड़ा।



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मान्यताओं के आगे श्रद्धालुओं ने तोड़ दिए कोरोना गाइडलाइन।


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