एक भी मतदाता का नहीं बिगड़ा तापमान, स्कैनर में सभी पास; 93 पर कोविड गाइडलाइन तोड़ने का मामला दर्ज
प्रथम चरण के लिए बुधवार को बिहार के 16 जिलों की 71 सीटों पर वोटिंग हुई। कोरोना काल में चुनाव को लेकर बड़ी तैयारी थी। मतदाताओं को प्लास्टिक का दस्ताना देने के साथ उनके शरीर का तापमान लेने के लिए स्क्रीनिंग की विशेष व्यवस्था की गई थी। हर मतदान केंद्र पर स्वास्थ्य कर्मियों को इंफ्रारेड थर्मामीटर के साथ लगाया गया था। लेकिन चौकाने वाला मामला यह है कि प्रथम चरण में 31371 मतदान केंद्रों पर हुई वोटिंग में एक भी मतदाता के शरीर का तापमान अधिक नहीं राहा। निर्वाचन कार्यालय से लेकर जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने एक भी ऐसे मतदाता की जानकारी नहीं दी है।
दैनिक भास्कर डिजिटल की टीम ने भी बिहार के 16 जिलों में
हुए चुनाव में सौ से अधिक बूथों की पड़ताल की है कहीं से भी कोई संदिग्ध मतदाता नहीं पाया गया है। जबकि मतदान के समय बुधवार को काफी कड़ी धूप रही और मतदाताओं को छाए में रहने का भी कोई इंतजाम नहीं था। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना था इस काण से लाइन भी लंबी होती गई थी। निर्वाचन में लगे पदाधिकारियों का कहना है कि 98 से अधिक तापमान किसी मतदाता का आया ही नहीं है।
कहीं जांच में तो नहीं हुई चूक
इंफ्रारेड थर्मामीटर को स्क्रीनिंग का सबसे अच्छा माध्यम माना गया है। चुनाव को लेकर भी अधिक संख्या में ऐसे थर्मामीटर की खरीददारी की गई है। हर मतदान केंद्र पर एक-एक इंफ्रारेड थर्मामीटर स्क्रीनिंग के लिए दिया गया है। यह थर्मामीटर बहुत जल्दी अपनी रिडिंग बदल देता है। एक साथ अधिक संख्या में मतदाताओं की जांच करनी थी और मशीन को रेस्ट नहीं था। ऐसे में हमेशा ऑन रहने वाले थार्मामीटर की बैट्री भी कमजोर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। अगर इंफ्रारेड थर्मामीटर की बैट्री लो हुई तो भी शरीर के तापमान की रीडिंग कम आएगी। हालांकि इस संबंध में मतदान केंद्रों पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने बात की गई तो उन्होंने बताया कि कोविड को लेकर विशेष निगरानी है और बिना तापमान की जांच किए ममदाताओं को केंद्र में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है।
आशा और सिपाहियों के जिम्मे था बुखार जांचने का काम
मतदान केंद्रों पर कोई विशेष एक्सपर्ट को भी स्क्रीनिंग के लिए नहीं लगाया गया था। गेट पर आशा कर्मियों के साथ एएनएम या फिर पुलिस व होमगार्ड के जवान बुखार की जांच करते देखे गए। 31371 मतदान केंद्रों पर एक भी अधिक तापमान वाले मतदाताओं का नहीं मिलना भी बड़ा सवाल है। स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों का कहना है कि मतदान के दिन धूप काफी कड़ी थी और ऐसे में शरीर का तापमान वैसे भी बढ़ जाता है। जिसको फीवर होगा उसका तापमान तो बढ़ जाएगा, लेकिन धूप के कारण तापमान की जांच को लेकर कर्मि हल्के में लेते हैं। तापमान अधिक आने के बाद भी वह धूप के कारण उसे नजर अंदाज करते हैं। हालांकि बहुत अधिक बुखार रहने पर वह इसपर ध्यान देते हैं लेकिन बुधवार को अधिक बुखार वाला एक भी मतदाता निर्वाचन कार्यालय की सूची में नहीं है।
अधिक तापमान वालों के लिए थी व्यवस्था
मतदान केंद्रों पर अधिक तापमान वाले मतदाताओं के लिए विशेष रूप से व्यवस्था की गई थी। ऐसे मरीजों को मतदान केंद्र पर ही रोक लेने की व्यवस्था की गई थी। उन्हें मेडिकल परीक्षण के बाद मतदान के आखिरी एक घंटे में वोटिंग करने की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए बूथों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम और एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गई थी, लेकिन किसी भी मतदान केंद्र पर ऐसे मतदाता नहीं आए हैं। निर्वाचन आयोग ने भी जो जानकारी दी है उसमें किसी भी मतदाता के फीवर के कारण वोटिंग में देरी की बात नहीं कही है। जिला प्रशासन द्वारा भी ऐसी कोई सूचना नहीं दी गई है। पटना में भी जिला प्रशासन ने ऐसे मतदाताओं की कोई जानकारी नहीं बताई है। इसके पीछे मतदान में लगे कर्मियों का कहना है कि किसी के अंदर समस्या आई ही नहीं जिससे उन्हें रोककर बाद में वोट कराया जाए।
2,14,06,096 मतदाताओं में 53.54 प्रतिशत मतदान, किसी को नहीं बुखार
प्रथम चरण के मतदान में कुल 2,14,06,096 मतदाताओं को वोटिंग करनी थी। इसमें 1,12,76,396 पुरुष और 1,01,29,101 महिलाएं व 599 ट्रास जेंडर शामिल हैं। लेकिन 53.54 प्रतिशत वोटरों ने ही मतदान किया है। इसमें किसी भी मतदाता में बुखार नहीं पाया गया है। अगर बुखार के कारण कोई मतदाता रोका गया होता तो इसकी जानकारी निर्वाचन कार्यालय से लेकर जिला प्रशासन से दी जाती। पड़ताल में भी किसी भी बूथ से ऐसे मामले सामने नहीं आए हैं।
93 लोगों पर कोविड गाइडलाइन तोड़ने का मामला दर्ज
कोरोना काल में चुनाव के दौरान कोरोना गाइडलाइन के उलंघन का मामला भी तेजी से सामने आ रहा है। दैनिक भास्कर डिजिटल ने आए दिन ऐसे चेहरों को बेनकाब किया है जो कोरोना की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा रहे हैं। ऐसे मामलों को निर्वाचन आयोग ने भी गंभीरता से लिया है। राजनेताओं की सभा और अन्य कार्यक्रमों में कोरोना गाइडलाइन को तोड़ने वाले 93 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। इस मामले को भी आचार संहिता उलंघन के मामले की श्रेणी में रखा गया है क्योंकि चुनाव से पूर्व भारत निर्वाचन आयोग ने कोरोना गाइडलाइन का अक्षरशः: पालन करने का निर्देश प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को दिया था। जिले स्तर पर इस काम में निगरानी नहीं हो पाई है। हर रोड शो के साथ नेताओं की सभा में कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ी लेकिन कार्रवाई में प्रशासन फिसड्डी रहा।
आयोग की सख्ती पर हुई कार्रवाई
चुनाव आयोग जब कोरोना गाइडलाइन को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया तो जिला निर्वाचन पदाधिकारियों ने मनमानी करने वालों पर कार्रवाई करनी शुरु कर दी। चुनाव आयोग के बाद प्रथम चरण के चुनाव में अब तक 93 लोगों पर कोविड गाइडलाइन का उलंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। निर्वाचन आयोग ने बताया है कि कोविड 19 के मामले में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम तहत कांड दर्ज किया गया है।
एक नजर में कोविड गाइडलाइन
कोरोना काल में चुनाव को लेकर कोविड गाइड लगाइन तैयार की गई है। इसमें सोशल डिस्टेंसिंग के साथ हर व्यक्ति को मास्क लगाना जरुरी बताया गया है। नेताओं की सभा में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के साथ सभा में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को मास्क लगाना है। सभा में सैनिटाइजेशन का भी विशेष जोर देना है। अगर भीड़ अधिक होती है तो संबंधित नेता के खिलाफ कांड दर्ज किए जाने का प्राविधान बनाया गया है और ऐसे ही प्राविधानों के तहत प्रथम चरण के चुनाव की तैयारियों के बीच 93 लोगों पर कोविड 19 गाइडलाइन के उलंघन का मामला दर्ज किया गया है।
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